राष्ट्रीय

बीजेपी में एक और बाहरी नेता पहुंचा सत्ता के शीर्ष पर लिस्ट लंबी होती जा रही है

बीजेपी में एक और बाहरी नेता पहुंचा सत्ता के शीर्ष पर लिस्ट लंबी होती जा रही है

कई दिनों की कवायद के बाद कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिल गया है. हालांकि केंद्र और राज्य दोनों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बार फिर ‘बाहरी नेता’ पर भरोसा जताया और प्रदेश की कमान सौंप दी. हाल के कुछ सालों में बीजेपी ने ‘बाहरी’ नेताओं पर ज्यादा भरोसा जताया है. ‘बाहरी’ वो हैं जो पहले कभी दूसरी पार्टी में रहे लेकिन बाद में पाला बदलकर भगवा पार्टी के साथ जुड़ गए.

बसवराज बोम्मई कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनाए गए हैं. बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद बेंगलुरु में मंगलवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई और बसवराज को मुख्यमंत्री के रूप में चुन लिया गया. पेशे से इंजीनियर बसवराज ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल के साथ की थी.

हालांकि उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) को छोड़ दिया और 2008 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. बीजेपी के साथ 13 साल के सफर में अब वह प्रदेश के 23वें मुख्यमंत्री बने हैं. सिर्फ बसवराज बोम्मई ही अकेले ऐसे नहीं हैं जिनके राजनीतिक करियर की शुरुआत किसी और पार्टी से हुई और फिर बाद में बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री बने.

असम में बीजेपी के दो सीएम ‘बाहरी’

इस लिस्ट में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का नाम भी करीब ढाई महीने पहले जुड़ा है. हिमंत बिस्व सरमा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत असम गण परिषद (AGP) के साथ की थी, लेकिन बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए. हालांकि वह ज्यादा समय तक इस पार्टी के साथ नहीं जुड़े रह सके और तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के साथ अनबन होने पर जुलाई 2014 में पार्टी छोड़ दी.

हिमंत बिस्व सरमा अगस्त 2015 में भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े. भगवा पार्टी के साथ जुड़ते ही उन्हें पार्टी ने कई अहम जिम्मेदारियां भी दीं. 2016 में असम में बीजेपी की पहली सरकार में वह मंत्री बने. लेकिन मई 2021 में वह राज्य के मुख्यमंत्री पद पर भी काबिज हो गए. उन्होंने 10 मई को राज्य के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की. जाहिर है कि हिमंत बिस्व सरमा भी बाहर से आए और बाद में बीजेपी की ओर से सीएम बने.

हिमंत बिस्व सरमा से पहले राज्य में बीजेपी की पहली सरकार बनी थी सर्बानंद सोनोवाल की. वह भी पहले से ही बीजेपी में नहीं थे. उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत असम गण परिषद से हुई लेकिन बाद में वह 2011 में बीजेपी में शामिल हो गए. फिर 2016 में यानी बीजेपी में आने के 5 साल बाद ही भगवा पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री बन गए.

JMM से आगे बढ़े अर्जुन मुंडा 

अर्जुन मुंडा भी इस लिस्ट में शामिल है. उनकी राजनीति की शुरुआत हुई झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ. मुंडा 1995 में JMM के टिकट पर पहली बार खरसावां सीट से विधायक बने. तब उनकी उम्र तकरीबन 27 साल थी. साल 2000 में अगला विधानसभा चुनाव हुआ. यह अविभाजित बिहार का आखिरी चुनाव था.

हालांकि चुनाव से पहले वह पार्टी बदलकर बीजेपी में आ गए. 2000 का चुनाव भी वो खरसावां सीट से जीते. राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने बाबूलाल मरांडी. अर्जुन मुंडा आदिवासी बहुल राज्य की इस पहली सरकार में आदिवासी कल्याण मंत्री बनाए गए . लेकिन बाबूलाल अपना कार्यकाल पूरा कर पाते, इससे पहले ही जनता दल यूनाइटेड (JDU) और समता पार्टी के विधायकों ने बगावत कर दी जिससे यह सरकार गिर गई.

18 मार्च 2003 को बाबूलाल मरांडी की जगह महज 36 साल की उम्र में अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री बनाए गए. पार्टी बदल कर बीजेपी में शामिल होने के महज 3 साल में वह मुख्यमंत्री बन गए

मणिपुर में बिरेन सिंह

‘बाहरी’ नेता की लिस्ट में एन बिरेन सिंह भी शामिल हैं. जो अपनी 2 पुरानी पार्टी में रहने के बाद बीजेपी में आए और आने के करीब सालभर में मुख्यमंत्री भी बन गए.

पहले फुटबॉलर फिर पत्रकार और उसके बाद नेता बने एन बिरेन सिंह ने 2002 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत क्षेत्रीय पार्टी डेमोक्रेटिक पीपुल्‍स पार्टी से की. बिरेन सिंह राज्‍य की हेनगांग विधानसभा सीट से विधायक चुने गए लेकिन साल 2004 के विधानसभा चुनाव से पहले इस पार्टी का विलय कांग्रेस में हो गया.

बीरेन एक समय मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के खास सहयोगी हुआ करते थे. लेकिन अक्टूबर 2016 में बीरेन ने असंतोष जाहिर करते हुए इबोबी सिंह सरकार से अलग हो गए. साथ ही कांग्रेस की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया और फिर 17 अक्टूबर को बीजेपी में शामिल हो गए.

2016 में कांग्रेस छोड़ने वाले बिरेन सिंह अगले साल मार्च 2017 में मणिपुर में बीजेपी की पहली सरकार में मुख्यमंत्री बन गए. यानी पार्टी बदलने के 6 महीने के अंदर.

पेमा खांडू 

पेमा खांडू का नाम भी इस लिस्ट में हैं. पेमा खांडू वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. 17 जुलाई 2016 को मुख्यमंत्री बनने के बाद से, उन्होंने और उनकी सरकार ने दो बार अपनी पार्टी संबद्धता बदली है. सितंबर में कांग्रेस से पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल, और फिर दिसंबर 2016 में भारतीय जनता पार्टी में. तब उनकी उम्र 37 साल थी.

पेमा खांडू वर्तमान में भारत में सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री भी हैं. वह अरुणाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के दूसरे मुख्यमंत्री बने. उनके पिता दोरजी खांडू भी मुख्यमंत्री रहे हैं.

अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की यह दूसरी सरकार है. इससे पहले 2003 में गेगोंग अपांग की अगुवाई में बीजेपी की पहली सरकार राज्य में बनी थी. तब उनकी सरकार 43 दिन ही चल सकी थी. पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी की यह पहली सरकार थी. बाद में गेगोंग अपांग ने बीजेपी छोड़ दी और जनता दल सेकुलर के साथ जुड़ गए

बंगाल में शुभेंदु अधिकारी

कुछ अन्य और बड़े नाम हैं जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत दूसरी पार्टी से की लेकिन बाद में जब वह बीजेपी में जुड़े तो उन्हें पार्टी में ऊंचा ओहदा दे दिया गया. पश्चिम बंगाल सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने पिछले साल तृणमूल कांग्रेस को छोड़ दिया और बीजेपी में शामिल हो गए

शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में टीएमसी नेता ममता बनर्जी को हरा दिया हालांकि वह बीजेपी को राज्य में जीत नहीं दिला सके. विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया.

ज्योतिरादित्य सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया पहले कांग्रेस में थे, लेकिन पिछले साल 18 साल कांग्रेस में रहने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री 11 मार्च को बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वह मंत्री बनाए गए. वह केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री बनाए गए.

 

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close