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नोएडा अथॉरिटी के लिए काला दिन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अथॉरिटी की आंख, नाक, कान और चेहरे से टपकता है भ्रष्टाचार

नोएडा अथॉरिटी के लिए काला दिन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अथॉरिटी की आंख, नाक, कान और चेहरे से टपकता है भ्रष्टाचार

नोएडा अथॉरिटी के लिए बुधवार का दिन काला साबित हुआ है। देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को नोएडा में एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर एपेक्स और सियान के मामले में सुनवाई के दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी पर बेहद तीखी टिप्पणियां करते हुए कहा, “नोएडा एक भ्रष्ट निकाय है। इसकी आंख, नाक, कान और चेहरे तक से भ्रष्टाचार टपकता है। अदालत ने पूरी तरह प्राधिकरण को इस विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल उठाए

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल उठाए। दो दिनों से इस मामले की सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने मामले में सुपरटेक और नोएडा अथारिटी की अपीलों पर सभी पक्षों की बहस सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जल्दी ही फैसला आने की उम्मीद है। आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में एमराल्ड कोर्ट ओनर्स रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए एपेक्स और सियान टावरों को गलत ठहराया था। इन्हें ढहाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने सुपरटेक को फ्लैट बुक कराने वालों को पैसा वापस करने का आदेश दिया था। साथ ही प्लान सेंक्शन करने के लिए जिम्मेदार नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश दिया था।

कोर्ट का आदेश- जो लोग पैसा वापस चाहते हैं, उन्हें पैसा लौटाया जाए

इस फैसले को सुपरटेक, नोएडा प्राधिकरण और कुछ फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में एपेक्स और सियान टावर गिराने पर रोक लगा दी थी और यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया था। साथ ही सुपरटेक कम्पनी के निदेशकों से कहा था कि जो लोग पैसा वापस चाहते हैं, उन्हें पैसा लौटाया जाए। कोर्ट ने एनबीसीसी से दोनों टावरों पर रिपोर्ट मांगी थी। एनबीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दोनों टावरों के बीच जरूरी दूरी नहीं है। अब मामले की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ कर रही है।

कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी के वकील को दिया जवाब

सुनवाई के दौरान नोएडा अथॉरिटी के वकील रविन्द्र कुमार ने जब एमराल्ड कोर्ट के एपेक्स और सियान टावर के निर्माण को जायज ठहराया और रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दी गई दलीलों का विरोध किया तो जस्टिस एमआर शाह ने उनके बहस के तरीके पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह आप फ्लैट मालिकों के खिलाफ केस लड़ रहे हैं, वह तरीका उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा, “आप सुपरटेक की मदद ही नहीं कर रहे, आप उसके साथ मिले हुए हैं।”

नोएडा का काम हैरान करने वाला है : जस्टिस चंद्रचूड़

जस्टिस चंद्रचूड़ ने मामले में नोएडा अथारिटी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, “नोएडा का काम हैरान करने वाला है।” जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “जब आपसे रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने बिल्डिंग का सैंक्शन प्लान मांगा तो आपने सुपरटेक से पूछा और उसने मना कर दिया। आपने बिल्डिंग प्लान नहीं दिया। अंत में हाईकोर्ट के आदेश पर आपने हाईकोर्ट में प्लान दिया। आप सुपरटेक की मदद ही नहीं कर रहे, आपकी उसके साथ मिलीभगत है। नोएडा एक भ्रष्ट निकाय है, इसकी आंख, नाक, कान और यहां तक कि चेहरे तक से भ्रष्टाचार टपकता है।” जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा, “हम लोग भी वकील रहे हैं। याचिकाकर्ता, प्रतिवादी और अथॉरिटी सभी की ओर से पेश हुए हैं।”

सुपरटेक ने नियम का उल्लंघन किया

इसके बाद रविन्द्र कुमार ने एपेक्स और सियान टावर के सैंक्शन प्लान और टावरों के बीच दूरी से संबंधित नियमों, बिल्डिंग ब्लाक आदि का हवाला देना शुरू किया। इस मामले में रेजीडेंट एसोसिएशन की मुख्य दलील है कि सुपरटेक ने एपेक्स और सियान टावर बनाने में दो बिल्डिंगों के बीच की जरूरी दूरी के नियम का उल्लंघन किया है। इसके अलावा सुपरटेक ने उनके लिए तय कॉमन एरिया और हरित क्षेत्र में कटौती करके उस जगह नये टावर बनाने से पहले उनकी सहमति नहीं ली है।

सुप्रीम कोर्ट भविष्य के लिए नजीर दे : न्याय मित्र

कोर्ट ने इस मामले में हल निकालने के लिए एक न्याय मित्र की नियुक्ति की है। सुनवाई में कोर्ट की मदद कर रहे न्यायमित्र गौरव अग्रवाल ने कहा, फायर सेफ्टी के लिहाज से नियम हैं। जिनके मुताबिक दो बिल्डिंगों के बीच दूरी उनकी ऊंचाई के आधार पर तय होती है। सबसे ऊंची बिल्डिंग की ऊंचाई से आधी दूरी दोनों के बीच रहनी चाहिए। जैसे कि अगर बिल्डिंग 20 मीटर ऊंची है तो दो बिल्डिंगों के बीच 10 मीटर की दूरी होनी चाहिए। गौरव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को भविष्य के लिए दो इमारतों के बीच जरूरी दूरी के बारे में व्याख्या करनी चाहिए। रविन्द्र कुमार ने बिल्डिंग सैंक्शन प्लान देने वाले नोएडा अथारिटी के अधिकारियों को प्रोसिक्यूट करने के हाईकोर्ट के आदेश का विरोध किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने न तो अधिकारियों को पक्षकार बनाया और न ही उनका पक्ष सुना। अधिकारियों ने नेशनल बिल्डिंग कांसट्रक्शन कारपोरेशन के प्रविधानों की बोनाफाइड व्याख्या की है।

हमने किसी नियम को नहीं तोड़ा : सुपरटेक

सुपरटेक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अपनी दलील रखीं। उन्होंने कहा कि सुपरटेक ने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। एपेक्स और सियान टावर का पूरा प्रोजेक्ट अलग है और एमराल्ड कोर्ट के टावर एक में रह रहे लोगों का प्रोजेक्ट प्लान अलग है। उन लोगों के ग्रीन एरिया को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि नियम के मुताबिक जितना ग्रीन एरिया छोड़ा जाना था, उससे ज्यादा सेंट्रल पार्क में छोड़ा गया है। उसके पास फायर की एनओसी है। कोर्ट में कुछ खरीदारों की ओर से भी पक्ष रखा गया। बहस पूरी होने पर कोर्ट ने सभी को सोमवार तक संक्षिप्त नोट दाखिल करने की छूट दी और फैसला सुरक्षित रख लिया।

अब दोनों टावर में केवल 252 बुकिंग बाकी हैं

आपको बता दें कि सुपरटेक ने बुधवार को कोर्ट को बताया कि एपेक्स और सियान टावर में कुल 915 फ्लैट और 21 दुकानें हैं। इसमें शुरू में 633 लोगों ने बुकिंग कराई थी। जिसमें से 248 लोगों ने पैसा वापस ले लिया है। 133 लोगों ने सुपरटेक के दूसरे प्रोजेक्ट में निवेश कर दिया है और 252 लोग अभी बचे हैं, जिन्होंने पैसा वापस नहीं लिया है। सुपरटेक को दोनों टावरों से करीब 188 करोड़ रुपये मिले थे। जिसमें से उसने 148 करोड़ रुपये वापस कर दिये

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