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नोएडा-ग्रेटर नोएडा के फ्लैट खरीदारों के लिए आया बड़ा फैसला

नोएडा-ग्रेटर नोएडा के फ्लैट खरीदारों के लिए आया बड़ा फैसला

नोएडा. उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्रधिकरण (UP RERA) ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सैकड़ों फ्लैट बॉयर्स को बड़ी राहत दी है. यूपी रेरा ने सुनवाई के दौरान कई साल से अपना फ्लैट लेने का इंतजार कर रहे बॉयर्स को राहत दी है. तीन बड़े प्रोजेक्ट में 1.5 हजार से ज्यादा फ्लैट बॉयर्स को रेरा के इस आदेश से राहत मिली है. अब इन तीनों ही प्रोजेक्ट में बॉयर्स और बिल्डर (Builder) मिलकर अधूर टॉवर्स को पूरा कराएंगे. कई चरण की सुनवाई के बाद रेरा में बिल्डर और बॉयर्स ने इस फैसले पर अपनी सहमति दे दी है. रेरा के सदस्य इसकी निगरानी करेंगे. गौरतलब रहे नोएडा (Noida)-ग्रेटर नोएडा में हजारों फ्लैट बॉयर्स ऐसे हैं जिन्होंने 10-10 साल पहले फ्लैट की पूरी रकम बिल्डर को दे दी है, लेकिन अभी तक फ्लैट बनकर तैयार नहीं हुए हैं और फ्लैट बॉयर्स (Flat Buyers) किराए पर रहने को मजबूर हैं.

ये हैं वो तीन प्रोजेक्ट जिसमे रेरा ने दी है राहत

यूपी रेरा से जुड़े सदस्य की मानें तो एक प्रोजेक्ट गाजियाबाद क्रॉसिंग के पास एडविक होम्स प्राइवेट लिमिटेड बिल्डर का अंसल एक्वापॉलिश प्रोजेक्ट है. गौरतलब रहे साल 2013 में यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था. उसी दौरान लोगों ने अपना पैसा लगातार फ्लैट बुक कराया था. लेकिन अभी तक टॉवर तो छोड़ो एक फ्लैट भी बनकर तैयार नहीं हुआ. जून, 2021 में प्रोजेक्ट का रेरा में दर्ज पंजीकरण भी खत्म हो चुका है. इसके बाद फ्लैट खरीदार यूपी रेरा पहुंच गए. रेरा में सुनवाई के दौरान तय हुआ कि बिल्डर और खरीदार उस टॉवर को तैयार कराएंगे जिसमे 192 खरीदारों के फ्लैट हैं. इसकी लागत 27 करोड़ रुपये आने की उम्मीद जताई गई है.

एक अन्य प्रोजेक्ट ग्रेटर नोएडा में यूनिबेरा के नाम से हैं. यह प्रोजेक्ट साल 2016 में शुरू हुआ था. लेकिन औरों की तरह से इसके खरीदारों को भी अभी तक फ्लैट नहीं मिले हैं. रेरा का पंजीकरण भी खत्म हो चुका है. रेरा ने इसका भी हल निकालते हुए कहा है कि यह पांच टॉवर का मामला है. इसमे 700 से ज्यादा फ्लैट खरीदार हैं. इसलिए इसे भी बिल्डर और खरीदार दोनों ही मिलकर तैयार कराएंगे. ऐसी उम्मीद है कि इसे तैयार करने में करीब 75 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

इसी तरह से गाजियाबाद क्रॉसिंग रिपब्लिक के पास नोवीना ग्रीन प्रोजेक्ट भी है. यह भी एक बड़ा प्रोजेक्ट है. यह भी साल 2013 में शुरू हुआ था. इसके भी 6 टॉवर में 700 से ज्यादा फ्लैट खरीदार अपने फ्लैट का इंतजार देख रहे थे. लेकिन 8 साल बाद भी बिल्डर से उन्हें अपना फ्लैट नहीं मिला था.

यूपी रेरा ने इसका समाधान भी उसी तरीके से निकाला कि बिल्डर और खरीदार पैसा जमाकर अधूरे काम को पूरा कराएंगे. अक्टूबर 2019 में रेरा में दर्ज इसका पंजीकरण भी खत्म हो चुका है. इस पर 27 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

 

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