दनकौर

श्रीमद् भागवत कथा में आज श्री कृष्ण के मथुरा  जाने को लेकर  बहुत ही मार्मिक वर्णन  व्यास जी द्वारा किया गया जिस पर श्रीमद् भागवत कथा में व्यास जी सहित उपस्थित सभी भक्तजन भाव विभोर होकर रोने लगे

दनकौर: श्री द्रोण गौशाला परिसर चल रही   श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस के पावन प्रसंग में परम पूज्य कथा व्यास श्री परम श्रद्धेय हरिशरण उपाध्याय जी महाराज ने महारास कथा का वर्णन किया| महाराज श्री ने कहा संपूर्ण भागवत भगवान का वांग्मय स्वरूप है दशम स्कंध भगवान का हृदय है और गोपी गीत भगवान के पंचप्राण है और महारास कथा भगवान की काम विजय कथा है| जो संदेह रहित होकर महारास की कथा को श्रद्धा और भाव के साथ श्रवण करता है उसके मन के सभी विकार समाप्त होकर भगवान की भक्ति की प्राप्ति होती है |गोपी उद्धव संवाद के प्रसंग में पुण्य महाराज श्री ने प्रेम का वर्णन किया| हमारे जीवन में प्रेम का होना बहुत जरूरी है प्रेम और भक्ति के द्वारा ही भगवान की प्राप्ति होकर हम जन्म मरण के चक्कर से छूट जाते हैं और हमारा जीवन सफल हो जाता है |

कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने सुंदर ढंग से श्री रुक्मणी मंगल विवाह की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि रुक्मणी ने पति के रूप में भगवान श्री कृष्ण का वर्ण किया रुक्मणी ने तन मन धन से भगवान की शरण ग्रहण की| रुक्मणी विवाह में सभी भक्त भावविभोर हो गए दिव्य भजनों के द्वारा सभी ने नृत्य करते हुए आनंद प्राप्त किया| रुक्मणी विवाह की मंगल कथा को जो भी भक्त श्रवण करता है उसको भगवान की भक्ति प्राप्त होती है|

श्री मद भागवत के षष्ठम दिवस पर पूज्य महाराज श्री हरिशरण उपाध्याय जी ने गिरिराज गोवर्धन की पूजा का रहस्य बताया कि श्री कृष्ण ने इंद्र की पूजा छुड़वाकर गोवर्धन की पूजा करके प्रकृति की पूजा करने का संदेश दिया।और गोपियों के साथ महारास का मतलब ये कोई स्त्री पुरुष का रास नहीं बल्कि ये तो ब्रह्म और प्रकृति का दिव्य महारास है।जो निरंतर चल रहा है।कथा का विश्राम रुक्मणि कृष्ण विवाह के साथ बड़े धूम धाम से झांकी के साथ संपन्न हुआ।

प्रस्तुति -मुख्य संपादक ओम प्रकाश गोयल व वंदना सरन उपाध्याय

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