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कट्टरवादी जिहादी व खालिस्तानी मानसिकता की भेंट चढ़ती मानवता -दिव्य अग्रवाल

कट्टरवादी जिहादी व खालिस्तानी मानसिकता की भेंट चढ़ती मानवता -दिव्य अग्रवाल

हिंदुस्तान में सोची समझी रणनीति के तहत हिन्दू धर्म व सनातनियो को निशाना बनाया जा रहा है । इसी मानसिकता व षड्यंत्र के कारण गुजरात के भरूच स्थित जलाराम बापा मन्दिर की होने वाली नित्य पूजा आरती को बाधित किया जाता है । जिस कारण परेशान होकर मंदिर समिति को नित्य संघर्ष का सामना करना पड़ता है । मंदिर के आस पास की कॉलोनी भी एक मुस्लिम परिवार से शुरू होकर आज मुस्लिम बाहुल्य हो चुकी है । कम हिन्दू जनसंख्या वाले स्थानों में बहूत सी जगह नवरात्रि में स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में कट्टरपंथियों ने खूब तांडव मचाया । जिनमे कुछ खबरे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गयी तो कुछ घटनाओं को दबा दिया गया । सिंधु बॉर्डर पर चल रहे तथाकथित किसान आंदोलन के आस पास के क्षेत्रो की 10 से ज्यादा लड़कियां आधिकारिक रूप से गायब है ।

दिव्य अग्रवाल
दिव्य अग्रवाल

आस पास के दुकानदारों पर भी हमले हो चुके हैं। एक दलित व्यक्ति की निर्मम हत्या तालिबानी तरीके से सिंधु बॉर्डर पर कर दी गयी है । वहां का क्षेत्रीय प्रासाशन भी इन घटनाओ के आगे बेबस है । अधिकतर जगह मुस्लिम दलित एकता के नाम पर हिन्दू समाज को विघटित करने का काम किया जा रहा है । राजस्थान मे भी इस पाखंडी एकता को ताक पर रखते हुए एक दलित हिन्दू भाई की हत्या कर दी गयी थी । क्या सभी राजनीतिक दलों को यह दिखाई नही दे रहा यदि भारत मे ही हिन्दू धर्म सुरक्षित या जीवित नही बचेगा तो इस भारत मे राजनेता , सत्ता किस पर करेंगे । क्या इस देश को मुस्लिम रास्ट्र या खालिस्तान बनाकर कोई भी राजनीतिक दल , सत्ता बना या काबिज रह सकता है । क्या हिंदुत्व का पतन ही आज सबका मूल उद्देश्य बन चुका है । हर बार हिन्दू देवी , देवताओं का अपमान , पूजा स्थलों में तोड़फोड़ , दलित हिन्दुओ की हत्या , हिन्दू लड़कियों के साथ दुराचार , लव जिहाद , जमीन जिहाद , हिन्दू पलायन , गैर हिन्दू बाहुल्य क्षेत्रो में मंदिरों की व्यवस्थाओं को बाधित करना आदि , दिन प्रतिदिन ये घटनाएं बढ़ती जा रही है । आज कबूतर की तरह सभ्य समाज ने अपनी आंखें बंद कर रखी हैं परन्तु यदि यह अमानवीय खेल इसी तरह चलता रहा तब क्या रास्ट्र सुरक्षा , मानवता का संरक्षण भारत मे सम्भव हो पाएगा । दिल्ली स्थित कालका मंदिर में भी नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं पर जिस तरह पुलिसकर्मी हाथ साफ कर रहे हैं ये बहूत ही शर्मशार करने वाला है । कब तक कूटनीति या एक्सपोज़ करने के समीकरण में आम नागरिक इस कट्टरवादी व अमानवीय सोच की बलि चढ़ता रहेगा । अब यदि कठोर कार्यवाही नही हुई तो कोई आश्चर्य नही जब इस किसान आंदोलन के माध्यम से आधुनिक भारत में नए भिंडरवाला वाले व्यक्तित्व का स्वरूप देखने को मिलेगा । लखीमपुर खीरी की घटना का खूब राजनीतिकरण हो रहा है पर छत्तीसगढ़ में जिस तरह हिन्दुओ को एक गाड़ी द्वारा रौंद दिया गया उस पर राजनीतिक दल मौन है । लखीमपुर में जिन लोगो द्वारा 5 लोगो की पीट पीट कर हत्या की गई उनकी गिरफ्तारी पर सब मौन है । सत्ता के लालच में कब तक आम आदमी की मौत पर राजनीति का खेल खेला जाएगा ये भी सभ्य समाज को सोचना होगा ।

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